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| Stock Market Crash |
Stock Market Crash: सेंसेक्स 950 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला; टाटा-महिंद्रा समेत इन शेयरों में भारी बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन अचानक तेज बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बाजार सीमित दायरे में नजर आया, लेकिन दोपहर के समय गिरावट ने रफ्तार पकड़ ली। सेंसेक्स 950 अंक से अधिक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी भी 319 अंक तक फिसला। इस गिरावट में ऑटो समेत कई प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।
सेंसेक्स और निफ्टी में अचानक बढ़ी गिरावट
बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 72,480 के स्तर पर बंद हुआ था। नए कारोबारी दिन इसकी शुरुआत 72,192 के स्तर से हुई। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद दोपहर करीब 1 बजे बिकवाली बढ़ी और सेंसेक्स 71,527 के स्तर तक पहुंच गया। इस तरह पिछले बंद स्तर की तुलना में इंडेक्स में 950 अंक से अधिक की कमजोरी दर्ज हुई।
इसी तरह एनएसई निफ्टी भी दबाव में रहा। निफ्टी का पिछला बंद स्तर 22,620 था और इसने 22,543 के आसपास कारोबार की शुरुआत की। बाद में बिकवाली बढ़ने पर इंडेक्स 22,301 के स्तर तक फिसल गया।
टाटा, महिंद्रा और मारुति समेत कई शेयर टूटे
बाजार की व्यापक गिरावट का असर बड़े शेयरों पर भी दिखाई दिया। लार्जकैप कंपनियों में Maruti में 4.45 फीसदी, M&M में 4.35 फीसदी और Tata Steel में 3.70 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा ITC, Adani Ports, BEL, Eternal और HUL भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
मिडकैप शेयरों में Policybazaar में 6.50 फीसदी, UPL में 4.07 फीसदी, Bharat Forge में 3 फीसदी और AU Bank में करीब 2.80 फीसदी की गिरावट रही। स्मॉलकैप सेगमेंट में Sansera और One Source जैसे शेयरों में भी तेज कमजोरी देखने को मिली।
Stock Market Crash के पीछे क्या रहे कारण?
बाजार में आई कमजोरी के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली को प्रमुख कारणों में गिना गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के बीच विदेशी पूंजी के भारतीय बाजार से बाहर निकलने का दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर को ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का आउटफ्लो देखा गया।
इसके साथ भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.98 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं, बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला India VIX करीब 5 फीसदी बढ़कर 14.13 पर पहुंच गया। बढ़ती बिकवाली, कमजोर रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ाया।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह गिरावट?
शेयर बाजार में अचानक होने वाली तेज गिरावट यह दिखाती है कि घरेलू बाजार पर वैश्विक संकेतकों और विदेशी पूंजी के प्रवाह का कितना असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में केवल इंडेक्स की चाल देखने के बजाय सेक्टर और व्यक्तिगत कंपनियों के प्रदर्शन को अलग-अलग समझना जरूरी हो जाता है। बाजार में आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और आगामी आर्थिक आंकड़ों से प्रभावित हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध बाजार आंकड़ों और समाचार जानकारी पर आधारित है। इसे निवेश सलाह या किसी शेयर को खरीदने-बेचने की सिफारिश न माना जाए। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

